मिटाना है यदि भ्रष्टाचार, जगाये मन में शुद्ध विचार।
करें सब तौबा तृष्णा से, सभी के प्रति हो सद व्यवहार॥
रिश्वत लेना पाप है , देना है अभिशाप।
रिश्वतखोरी बंद हो, तभी मिटे संताप॥
-देवेश शास्त्री
Monday, September 14, 2009
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