Thursday, December 3, 2009

प्रशासन का प्रयास

जनपद प्रदर्शनी एवं पशुमेला इटावा द्वारा आयोजित इटावा नुमायश (इटावा महोत्सव) को पूरे १०० वर्ष हो गए हैं लिहाजा शताब्दी वर्ष के इटावा महोत्सव का शुभारम्भ २५ नबम्बर २००९ को हुआ। भ्रष्टाचार को रोकने की दिशा में प्रशासन का प्रयास प्रशंसनीय तो माना जा रहा है, साथ ही कई सबाल भी खड़े हो गए हैं।
पहले प्रत्येक संयोजक को बजट के आधार पर चैक के माध्यम से धनराशि उपलब्ध करा दी जाती थी, तमाम संयोजक मनमाने तरीके से फर्जी बिल पेश कर खर्चा शो कर देते थे, कुछ लगनशील संयोजक अपनी जेब से बजट से भी ज्यादा खर्चा करते रहे, और कुछ ईमानदारी का परिचय देकर कार्यक्रम को भव्यता प्रदान करते रहे। इस भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाते हुए अध्यक्ष/जिलाधिकारी जी०एस० प्रियदर्शी तथा जनरल सेक्रेटरी/ अपर जिलाधिकारी रामकिशन शर्मा ने नई व्यवस्था के तहत कार्यकारिणी के परामर्श पर संयोजक तो बना दिए मगर किसी को कोई धनराशि देने की बजाय खर्चे की मद पूछ कर गतवर्ष के मुकाबले डेढ़ गुना खर्चा करने का वचन दिया। प्रत्येक कार्यक्रम के आमंत्रण-पत्रों की छपाई, बैनर, फूलमाला, नाश्ता, भोजन, आगंतुकों के यात्रा व्यव से लेकर पारिश्रमिक तक सभी कार्यों को प्रशासन अपने हाथ में लिए है। खालीजेब रहने के कारण कुछ संयोजक व कार्यकारिणी सदस्य नाखुश हैं और विद्रोह के मूड में प्रशासन व कार्यकारिणी के संवैधानिक अधिकारों व कर्तव्यों का विश्लेषण करने में लगे हैं।

नई व्यवस्था से उठे कई सबाल---
१- भ्रष्टाचार घटा या बढ़ा?
माना कि संयोजक घपलेबाजी करते थे, अब नही कर पारहे हैं। किंतु प्रशासन स्तर पर जो व्यवश्था की गयी है उससे प्रशासनिक अधिकारी, बाबू तथा दलालों की पौबारह है जमकर कमीशनखोरी के रूप में। फूलमाला से लेकर भोजन तक क्वालिटी के मुकाबले ज्यादा भुगतान दर्शाया जा रहा है।
२- उदघाटन के दिन मार्चपास्ट का बजट एक लाख रुपये था, वह कहाँ खर्चा हुआ?
३- संयोजक या बेगारी?
संयोजक तय क्यो किए गए? सिर्फ़ नाम के लिए बेगार को, अपना नियमित काम रोककर कार्यक्रम में जुटे इन संयाजकों को अपनी जेब से फ़ोन, पेट्रोल आदि व्यय करना पड़ता है, तो फ़िर वे सिर्फ़ बेगारी ही हुए।
४- टके सेर भांजी, टके सेर खाजा ?
२९ नवम्बर की रात स्थानीय कवि सम्मेलन हुआ, प्रदशनी के सदस्य विश्वभर नाथ भटेले संयोजक थे। कार्यक्रम पूरी रात सफलता पूर्वक चला। एक दिन पूर्व प्रशासन ने कवियों की सूची मांगी - पिछले वर्ष किसे कितना पारिश्रमिक दिया गया था ? संयोजक ने सब कुछ बताया- वरिष्ठता क्रम में ५०१,२५१,२०० व अनाहूत को १०० दिए गए थे, प्रशासन ने वरिष्ठता क्रम नहीं रखा और सभी को बराबर ५०० रुपये का भुगतान किया ७ अनाहूतो को १००-१०० दिए गए, क्या यह अंधेर नगरी नहीं? जहाँ ५० -६० वर्षों से निरंतर इस मंच की शोभा रहे बुजुर्ग काव्य साधक और कविता की पाठशाला में ककहरा पढ़ने वाले नवोदित कवि को बराबर तौला गया।
प्रशासन का तर्क है कवियों में असमानता को मिटाया गया है तो क्या २६ दिसंबर के अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में भी समानता का सिद्धांत दिखाई देगा?
देवेश शास्त्री

Monday, November 2, 2009

सपा का सफाया

इटावा और भरथना विधान सभा के उप चुनाव के नतीजे स्पष्ट रूप से यह सिद्ध करते है कि यहाँ की जनता ने सपा का सफाया कर दिया।
अपने जिले में जीत जाने के दंभ ने सपा प्रमुख श्री मुलायम सिंह यादव का ओवर कोंफीडेंस इतना बढ़ा दिया कि परिवारवाद के मोह से जन भावना को नहीं भांप पाये, और जनता ने पछाड़ दिया। इटावा से बीएसपी के महेंद्र सिंह राजपुतने अपनी सीट बरकरार रखी, सपा के विमल भदौरिया को परस्त किया। श्री राजपूत पिछले चुनाव में सपा से जीते थे। पार्टी छोड़ने के कारण पुनः जनादेश हासिल किया । भरथना से भी बीएसपी के श्री शिवप्रसाद यादव विजयी हुए। इस तरह अपने ही गढ़ में सपा का सफाया हो गया

राम-तिलक की चाहत

रामायण काल में सिर्फ़ एक बिभीषण था, रामभक्त।
घर का भेदी लंका ढाए। शायद इसीलिए, कोई भी अपने पुत्र का नाम हरगिज बिभीषण नहीं रखता।
लंकाधिराज रावण द्वारा निष्कासित बिभीषण जैसे ही रामदल में पहुँचे।
जातहि राम-तिलक तेहि सारा
जो सम्पति शिव रावनहि, दीन्ह दिए दसमाथ।
सोई सम्पदा विभीशनहि , सकुच दीन्ह रघुनाथ॥

आज राजनीति में बिभीषण ही बिभीषण दिखाई दे रहे हैं।
लंका ढहाने का दंभ भरते हुए राम तिलक की चाहत रखते हैं।
ताज्जुब, चारों ओर हैं रावण ही रावण,
जो बिभीषण के नाभिस्थ अमृत का रहस्य न खोलदेने के भय से,
विरोधी दल में सेंध लगाकर बिभीषण पैदा करते हैं
मंत्रिपद कातिलक कर विरोधी के नाभिस्थ अमृत का रहस्य जानने को।
सत्य स्वरुप राम कहीं हैं ही नहीं,
जो - निशिचर हीन करहु महि भुज उठाय प्रण कीन्ह ।
जैसा जनहित में लगा हो
सभी लुटेरे रावण है फ़िर कैसा राम-तिलक?

ये पब्लिक है सब जानती है, इसीलिए चुनाव में नकार देती है बिभीषनो को।
यही तो है भारतीय जनता का जंग-इमान।



Sunday, October 25, 2009

अब क्यों बैठे हैं श्रीमान ?

अब आख़िर श्रीमान आफिस में क्या कर रहे हैं?
छुट्टी तो ५ बजे हो गई थी, अब बज रहे हैं रात के १० ?
आज सन्डे को क्यो खुल गया ऑफिस?
जी हाँ! छुट्टी में ओफ्फिसर्स अपने बफादार बाबुओ के साथ दफ्तर में बैठ कर क्या वास्तव में ऑफिस वर्क निपटाते हैं या फ़िर करते हैं दंद-फंद ?
Dios ऑफिस में रात १० बजे यदि बत्ती जलती दिखे तो समझो किसी कॉलेज में
शिक्षनेतर कर्मचारी की नियुक्ति के लिए मिली रिश्वत के बंदरबांट व आवश्यक कागजो की लिखा पढ़ी के साथ चलती है पार्टी। bsa दफ्तर में भी ऑफिस टाइम के बाद ही अध्यापकों की नियुक्ति या स्थानान्तरण की गोटें कामयाब होती हैं। किसी बैंक शाखा में अन्दर से ताला डालकर मेनेजर व सिर्फ़ १ या २ बाबू काम कर रहे हों तो समझो लम्बी हेरा फेरी चल रही है अथवा मोटी रिश्वत पर किसी ख़ास का लोन मंजूर हो रही है। सिंचाई, नहर, pwd सहित विभिन्न कार्यालयों में वित्त वर्ष के अन्तिम दिनों देर रात तक खुले रहते ताले और बनती है मिसकौट शेष बजट के गोलमाल की। हमदर्द ठेकेदार को होता है बिना काम के भुगतान।
यह आलम पूरे देश का है।
सभी नेता, अफसर, बाबू, चपराशी सहित हर कोई कर रहा मनमानी कौन रोके?
हम और आप भी आपस में एक-दूसरे को दे रहे हैं धोखा , लगे है अपना उल्लू सीधा कराने में, कदम -कदम पर आनाचार, अत्याचार, व्यभिचार और भ्रष्टाचार।
चारों ओर आपा-धापी , हम्माम में सब हैं नंगे।

Monday, September 28, 2009

सत्यमेव जयते

दशहरा मेला रामलीला मैदान में एकत्रित हजारों दर्शक, राम और रावण में चला काफी देर युद्ध , मंच के नजदीक बना था रावण का पुतला जो बन उस वक्त तमाशा जब काफी मशक्कत के बाद भी नही फुक पाया
फुका भी, तो आधा - अधूरा ।
लोग ठहाका मारकर हंसपड़े , बात ही कुछ ऐसी थी ।
मेरे मन में विचार आया - अब न्याय के हाथों अन्याय , सद्वृत्ति के हाथों दुर्वृत्ति,
सत्य के हाथों असत्य व सदाचार के हाथों आनाचार का दहन मुश्किल है ,
किंतु काफ़ी जद्दोजहद के बाद पुतला फुक दिया गया।
तब विचार इस निष्कर्ष पर पहुचा सत्य, न्याय, सद्वृत्ति व सदाचार जीतेंगे मगर परेशान कितने ही क्यों न हों।

Monday, September 21, 2009

त्वरित प्रभाव

सदाचार से जुड़े धर्म-ईमान के sms अभियान शुरू हुए एक सप्ताह भी नहीं हुआ कि उसका त्वरित प्रभाव दिखाई देने लगा। अधिकारी, बाबू और कर्मचारी घबडाते हुए इष्टिकापुरी अकेडमी के संस्थापक देवेश शास्त्री व जंग-ऐ ईमान के एंटी करप्शन ग्रुप से सम्बद्ध सेवानिवृत्त अधिकारिओं, कर्मचारिओं व शिक्षकों को ब्लेकमेल कराने को दलालों के माध्यम से प्रलोभन देने लगे हैं, क्योंकि अबतक ऐसे जितने भी भ्रष्टाचार निरोधक अभियान छेड़े गए उनके आयोजकों का मंतव्य दोष पूर्ण रहा लिहाजा वे अपना उल्लू सीधा कर वैभव सम्पन्न हो गए। इसी तरह सामान्य लोगों की दृष्टि में इष्टिकापुरी अकेडमी का यह एंटी करप्शन अभियान भी कुछ ऐसी ही छवि को उभार रहा है।
वास्तविकता यह है कि इष्टिकापुरी अकेडमी रजिस्टर्ड संस्था है। इसने कभी किसी सरकारी, गैरसरकारी योजना में भागीदारी कर अनीति से धनार्जन नही किया। संस्थापक देवेश शास्त्री दरिद्र परिवार से सम्बद्ध होते हुए भी कभी सत्पथ से विचलित नहीं हुए। उन्होंने करीब २५ वर्षों तक अनैतिकता से दूर रहकर आनाचारियों के करीब रहते हुए कीचड में कमल की तरह सदाचार व नैतिकता पर कोई दाग नहीं आने दिया, इसमे दूषित पत्रकारिता, देश के भावी कर्णधारों के भविष्य से खिलबाड़ करने वाली शिक्षा व्यवस्था तथा चाटुकारपरक साहित्य लेखन शामिल है।
उन्होंने अब जो अभियान छेड़ा है वह निश्चित रूप से अब तक अन्य संगठनों द्वारा चलाये गए अभियानों से सर्वथा भिन्न है। इमानदारी के साथ जनसेवा, राष्ट्रसेवा का यह अभियान ;" सत्यम ब्रह्म जगन्मिथ्या " के मूल मन्त्र पर आधारित सद्धर्म की स्थापना का उद्देश्य लेकर यह अभियान छेड़ा गया है।
इष्टिकापुरी अकेडमी के संस्थापक देवेश शास्त्री का सत्य निष्ठा के साथ ऐलान है कि न केवल वे स्वयं बल्कि एंटी करप्शन अभियानसे जुड़े सेवानिवृत्त अधिकारी, कर्मचारी व शिक्षक कभी ब्लेकमेल नही करेगे। यदि कहीं कोई एंटी करप्शन अभियान ऑफ़ इष्टिकापुरी अकेडमी के नाम पर ब्लेकमेल करे तो आप ब्लेकमेलर का नाम, पता जरूर पूछें। तथा तत्काल ०९२५९११९१८३ पर सूचना दे।

Monday, September 14, 2009

सभी के प्रति हो सद व्यवहार

मिटाना है यदि भ्रष्टाचार, जगाये मन में शुद्ध विचार।
करें सब तौबा तृष्णा से, सभी के प्रति हो सद व्यवहार॥

रिश्वत लेना पाप है , देना है अभिशाप।
रिश्वतखोरी बंद हो, तभी मिटे संताप॥
-देवेश शास्त्री

Sunday, September 13, 2009

अभियान का श्रीगणेश

भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान का श्रीगणेश १२ सितम्बर २००९ को एस एम् एस के द्वारा सदाचार शीर्षक से धर्म-ईमान का संदेश जनपद स्तरीय अधिकारिओं, प्रतिष्ठित नागरिकों के पास भेजने के साथ हो गया है।

Friday, July 31, 2009

जिम्मेदार कौन?

अनाचार अत्याचार दुराचार व्यभिचार भ्रष्टाचार इस समय कण कण में व्याप्त है। सभी लोग बुरी तरह त्रस्त हैं। रिश्वतखोरी अब सामान्य कार्य व्यवहार का रूप ले चुकी है। मंत्री से लेकर संत्री तक कथित विरागी संत से लेकर जन सामान्य तक सभी भ्रष्ट हो चुके हैं। नैतिकता धर्म इमान सत्य अहिंसा व सदाचार सभी कुछ सिर्फ़ किताबों और व्याख्यानों तक सीमित हैं स्वयं चिन्तक व व्याख्याता धनतृष्णा में भ्रष्ट आचरण करते हुए बगुलाभगत बने सदाचारी सिद्ध कर रहे हैं।
इस तरह भ्रष्टाचार तेजी से शिष्टाचार का रूप धारण करता जा रहा है। अर्द्धशताब्दी के अन्दर भ्रष्टता अपने चरम पर पहुंच गई। लिहाजा सभी इस भ्रष्ट बातावरण से तंग तो आ गए हैं किंतु भ्रष्टाचार के विरुद्ध आवाज उठाने की वजाय निराशावादी दृष्टिकोण अपनाते हुए समझोतावादी बने हुए हैं। आख़िर इस हालत के लिए जिम्मेदार कौन है?

Friday, July 24, 2009

भ्रष्टाचार मिटाने का संकल्प

मानव का जीवन सत् पर आधारित होना चाहिए, गोस्वामी तुलसीदास ने लिखा है-बड़े भाग मानस तन पावा। सुर दुर्लभ सद्ग्रंथन गावा ......
८४ लाख योनियो के चक्कर से छुटकारा पाने को अर्थात मुक्ति प्राप्त कराने को मानव शरीर मिला है। किंतु तृष्णा ने मानव को अंधा बना दिया। धन की तृष्णा में मनुष्य अनैतिक तरीके से धन कमाने में जुटा है और उसके जीवन का आधार सत् ईमान धर्म की बजाय असत अन्याय व अधर्म हो गया। जनकल्याण के लिए इष्टिकापुरी अकादमी ने सेवानिवृत्त अधिकारियों कर्मचारियों व शिक्षकों का एंटी करप्शन ग्रुप बना कर धर्म व न्याय के युद्ध का बिगुल फूंका है।जून के अन्तिम सप्ताह जीआइसी के पूर्व प्रधानाचार्य श्री ब्रजानंद शर्मा के सरैया इटावा स्थित आवास पर करीब २ दर्जन सेवानिवृत्त अधिकारियों कर्मचारियों शिक्षकों की बैठक हुई जिसकी अध्यक्षता वयोवृद्ध शिक्षाविद श्री राम वर्मा ने की सम्मानित पूर्व प्रवक्ता सरदार अहमद अलीग मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे।बैठक में इष्टिकापुरी अकादमी के महासचिव देवेश शास्त्री ने भ्रष्टाचार को उखाड़ फेंकने के लिए युद्ध छेड़ने की घोषणा की और जब कुछ लोगों ने कहा - भ्रष्टाचार की जड़ें काफी मजबूत है कभी नही मिट सकता भ्रष्टाचार। इसपर श्री शास्त्री ने बेबाक कहा- १८५७ में यह कहा जाता कि अंग्रेजों कि जड़ें मजबूत हैं इन्हें भारत से कैसे खदेडा जाएगा? तो जंग ऐ आजादी कि चिंगारी नहीं सुलगती। जंग छिडी और ९० वर्ष बाद १९४७ में देशवासियों ने जंग जीती । इसी तरह हम भ्रष्टाचार को उखाड़ फेंकने की जंग छेड़ रहे हैं भले ही जीत १०० या २०० वर्ष बाद क्यो न मिलें। इस बात का न केवल सभी ने समर्थन किया बल्कि उनका उत्साह कई गुना बढ़ गया। कार्ययोजना को अन्तिम रूप दिया गया। साथ ही उन्होंने यह भी कहा - जो अपराधी होता है उसका आत्मबल शून्य हो जाता है जैसे बिनातिकट सफर कराने वाले रेलयात्री को हर वक्त चैकिंग का भय बना रहता है इतने में टी टी आ जाए तो उसकी बेचेनी ही उसे पकड़वा देती है बैसे ही रिश्वतखोर भी आत्मबल शून्य होता है मगर उसे फंसने की स्थिति में रिश्वत के ही बूते पर छूट जाने का विश्वास उसमें कुछ दम भरता है। श्री शास्त्री ने कहा- यह कहना ग़लत है कि भ्रष्टाचार कि जड़े काफ़ी मजबूत है। वास्तव में भ्रष्टाचार कि जड़े काफ़ी कमजोर हैं। सिर्फ़ ५-१० प्रतिशत ही भ्रष्ट है, किंतु ९०-९५ प्रतिशत लोगो का भ्रष्ट होना विवशता है। यदि दृढ़ इक्षाशक्ति के साथ पूरे देश में एक साथ जंग छिड़े तो भ्रष्टाचार मिटाने में ज्यादा बक्त नहीं लगेगा।
उन्होंने सेवानिवृत्त अफसरों कर्मचारिओं शिक्षको से कहा- यदि आप सोचें कि इसमें हमें क्या फायदा? ऐसी मानसिकता वाले अपने घर बैठें क्योकि ऐसे लोग अभियान को दूषित कर बदनामी का टीका लगा देंगे।यह अभियान त्याग और बलिदान की भावना से परिपूरित अनुष्ठान है जो आपके जीवन के अन्तिम पढाव पर उद्धार का साधन मोक्ष मार्ग प्रशस्त करने तथा यशप्रदान करने वाला होगा। सत्य-धर्म की पताका जब कभी फहरेगी तब आप का नाम स्वर्नाक्श्रो में अंकित रहेगा। नमो इष्ट सत्याय के साथ जंगे ईमान का बिगुल फूंक दिया गया।






नोट- इस अभियान की प्रत्येक गतिविधि इसी ब्लॉग पर तत्काल उपलब्ध मिलेगी।

कैसा हां-हाकार है

ये कैसा है कोलाहल कैसा हां-हाकार है ।
चारों ओर दिखाई देता भीषण नरसंहार है॥

निहित स्वार्थ वश हिंसा बढ़ती। बहकावे में जनता मरती ।
खून की नदियाँ यहाँ उफनती। मन में संकीर्णता पनपती।
मर्यादा के ऊपर कुर्सीराग का बज्र प्रहार है।
चारों ओर दिखाई देता भीषण नरसंहार है॥

कोई खाली पेट तड़पता। दो रोटी के लिए झगड़ता ।
बड़े पेट से दबकर मरता। घुट-घुट करके प्राण निकलता।
शोषक डंडीमार पनपता बढ़ता धन भंडार है।
चारों ओर दिखाई देता भीषण नरसंहार है॥

गिरता है शिक्षा का स्तर। तुष्टीकरण बनाता बदतर।
सुलग उठा है शिक्षा परिसर। राजनीत छात्रों के सर पर।
मेधा कुंठित होती अब तो ज्ञान दान व्यापार है।
चारों ओर दिखाई देता भीषण नरसंहार है॥

आरक्षी बल स्वयं अरक्षित। अपराधी खादी संरक्षित।
भुला दिए सब जनता के हित। घटनाएँ बढ़ चली अपरमित।
मुल्जिमान को खुली हवा सज्जन को कारागार है।
चारों ओर दिखाई देता भीषण नरसंहार है॥

कैसा भी हो काम कराना। जीते को चाहे हरवाना।
मरे को भी जिंदा करवाना। दफ्तर बैंक कचहरी थाना।
काले धन के स्रोत उजागर घूसखोर व्यवहार है।
चारों ओर दिखाई देता भीषण नरसंहार है॥

कहने को तो अभी बहुत है। अपनी भी तो बुरी नियत है।
विजय वरन कर रहा असत है। इनमें उनकी कहाँ बकत है।
निंदक नियरे नहीं चाटुकारों को मिलता प्यार है।
चारों ओर दिखाई देता भीषण नरसंहार है॥

-देवेश शास्त्री

Wednesday, July 22, 2009

माखन-लेपन नहीं मित्र पेट्रोल छिड़कना होगा।

सदाचार का पाठ पदाते युग के युग बीते हैं।
दुराचार की अति के आगे सदघट सब रीते हैं॥

नहीं पाठ्यक्रम सफल हो सके सिद्ध प्रयोग हुए हैं।
कटु औषधि के द्बारा ही मन-देह निरोग हुए हैं॥

असत , अधर्म, भ्रष्टता, आपाधापी बहुत गा चुके।
अलंकरण सम्मान, प्रशस्ती आख़िर बहुत पा चुके॥

बन्द करो यह पाठ पदाना बिगुल फूंक दो रन का।
सत्य धर्म की ध्वजा उठाकर पालन होवे प्रण का॥

जब संघर्ष छेड़ दोगे तब निश्चित जय पाओगे।
अगर नियति कह रहे टालते भय पर भय खाओगे॥

कलम मार्ग दर्शक है तो फ़िर तोप बनानी होगी।
स्याही की बूंदें बम की सामर्थ्य समानी होगी॥

माखन-लेपन नहीं मित्र पेट्रोल छिड़कना होगा।
चांदी नहीं, चर्म का जूता जमकर जड़ना होगा॥

लंका में चढ़कर ही रावण को सदगति देनी होगी।
दह में कूद कालिया नथ यमुना पवित्र करनी होगी॥

अधर्म अकर्म दुर्ग पर चढ़ परचम लहराओ।
सत्यमेव जयते सार्थक कर धर्म ध्वजा फहराओ॥

-देवेश शास्त्री

Tuesday, July 21, 2009

भ्रष्टाचार के विरुद्ध छेड़ें जंग

आप देश के किसी भी भाग में रहते हों आप वहां के सेवानिवृत्त इमानदार अधिकारिओं कर्मचारिओं को एकजुट करें और उनका एंटी करप्शन ग्रुप वनाएं।
अभियान चलायें।
भ्रष्टाचार मिटाए ।
इस वारे में ९२५९११९१८३ पर अथवा aishtikdarshan.satya@gmail.com पर अवश्य सूचित करें।
सहयोग के लिए धन्यवाद ।

कार्ययोजना

भ्रष्टाचार के विरुद्ध छेड़ी गई जंग के पहले चरण में इटावा के सेवानिवृत्त अधिकारियों कर्मचारियों व शिक्षकों का एंटी करप्शन ग्रुप जिला स्तरीय सरकारी कार्यालयों में धर्म और ईमान का पाठ पढाएगा। कर्मगति के पारलौकिक परिणाम से आगाह करेगा। साथ ही अनीति अधर्म अन्याय व असत मार्ग से धनार्जन (भ्रष्टाचार) न कराने की अपील करेगा। यह क्रम ३१ दिसम्बर २००९ तक चलेगा।
दूसरे चरण में जनवरी २०१० से जन जागरण अभियान छेड़ा जाएगा जिसके अर्न्तगत यदि कोई भी किसी से रिश्वत मांगता है तो वह एंटी करप्शन ग्रुप को सूचित करेगा तो ग्रुप सम्बंधित विभागाध्यक्ष से मिलकर हर स्तर पर जंग । प्रत्येक गतिविधि प्रिंट व इलेक्टोनिक मीडिया की देख-रेख में जारी रहेगी।

Sunday, July 19, 2009

ज़रा सोचो तो ...

मानव का जीवन सत् पर आधारित होना चाहिए, गोस्वामी तुलसीदास ने लिखा है-
बड़े भाग मानस तन पावा। सुर दुर्लभ सद्ग्रंथन गावा॥
साधन धाम मोक्ष कर द्वारा। ......
८४ लाख योनियो के चक्कर से छुटकारा पाने को अर्थात मुक्ति प्राप्त कराने को मानव शरीर मिला है। किंतु तृष्णा ने मानव को अंधा बना दिया। धन की तृष्णा में मनुष्य अनैतिक तरीके से धन कमाने में जुटा है और उसके जीवन का आधार सत् ईमान धर्म की बजाय असत अन्याय व अधर्म हो गया।
जनकल्याण के लिए इष्टिकापुरी अकादमी ने सेवानिवृत्त अधिकारियों कर्मचारियों व शिक्षकों का एंटी करप्शन ग्रुप बना कर धर्म व न्याय के युद्ध का बिगुल फूंका है।
जून के अन्तिम सप्ताह जीआइसी के पूर्व प्रधानाचार्य श्री ब्रजानंद शर्मा के सरैया इटावा स्थित आवास पर करीब २ दर्जन सेवानिवृत्त अधिकारियों कर्मचारियों शिक्षकों की बैठक हुई जिसकी अध्यक्षता वयोवृद्ध शिक्षाविद श्री राम वर्मा ने की सम्मानित पूर्व प्रवक्ता सरदार अहमद अलीग मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे।
बैठक में इष्टिकापुरी अकादमी के महासचिव देवेश शास्त्री ने भ्रष्टाचार को उखाड़ फेंकने के लिए युद्ध छेड़ने की घोषणा की और जब कुछ लोगों ने कहा - भ्रष्टाचार की जड़ें काफी मजबूत है कभी नही मिट सकता भ्रष्टाचार। इसपर श्री शास्त्री ने बेबाक कहा- १८५७ में यह कहा जाता कि अंग्रेजों कि जड़ें मजबूत हैं इन्हें भारत से कैसे खदेडा जाएगा? तो जंग ऐ आजादी कि चिंगारी नहीं सुलगती। जंग छिडी और ९० वर्ष बाद १९४७ में देशवासियों ने जंग जीती । इसी तरह हम भ्रष्टाचार को उखाड़ फेंकने कि जंग छेड़ रहे भले जीत१०० या २०० वर्ष क्यो न मिलें। इस बात का न केवल सभी ने समर्थन किया बल्कि उनका उत्साह कई गुना बढ़ गया। कार्ययोजना को अन्तिम रूप दिया गया।

नोट- इस अभियान की प्रत्येक गतिविधि इसी ब्लॉग पर तत्काल उपलब्ध मिलेगी।