Thursday, December 29, 2011

चंदाखोर शास्त्री?

श्री मधुर जैन ने कहा - शास्त्री जी ! गणेश ज्ञानार्थी का आरोप है कि शास्त्री जी २७-२७ हजार = ५४ हजार चंदा गोल कर गए , २७ हजार मकान निर्माण पर खर्च किया और २७ हजार से इलाज करा रहे हैं। मैंने मुस्कराते हुए कहा- आरोप छपा क्यों नहीं? छाप देते ताकि सभी लोग जान लेते कि आई ऐ सी प्रभारी देवेश शास्त्री क्या गुल खिला रहे हैं। तुमने नहीं छापा, मैं जरूर प्रसारित करूंगा।


मैं सफाई नहीं देता , जानना चाहता हूँ कि उक्त आरोप पर आप लोग कितना विश्वास करते हैं? मेरी सत्य निष्ठा पर ईश्वर को जरूर विश्वास है जो पुनर्जन्म देकर सिद्ध कर दिया- सत्यमेव जयते। भ्रष्टाचारियों द्वारा पवित्र सदाचारी अनुष्ठान इंडिया अगेंस्ट करप्शन को हाई जेक करने के प्रयास में सत्य ही जीतेगा।

Sunday, December 18, 2011

आसक्ति नहीं रही। स्वाभिमान के साथ ४२ साल के जीवन त्याग किया है । भ्रष्टाचार विरोधी मुहीम १९९१ में छेड़ी थी वह भी स्वनाम धन्य स्वतंत्रता सेनानी के खिलाफ जो नरक भोगते हुए पिछले साल ही शरीर छोड़ गया । लम्बी कहानी है ।



ग्यानधन दिगंबर जैन संस्कृत विद्यालय , दिगंबर जैन प्राइमरी पाठशाला को १९९० से १९९६ तक सेवा देकर ऐसे छोड़ दिया मानो हम यहाँ रहे ही न हों । मेरे पिताजी की आसक्ति इस पाठशाला से ऐसी रही कि १९५८ से मरने तक (१८ सितम्बर २०१०) तक पढाया । वेतन सुनकर रोने लगोगे - १९५८ में ३० रुपये फिरभी ठीक थे ५२ साल में वेतन बृद्धि किस गति से हुई- २०१० में मिलते थे मात्र ३५० रुपये यानि प्रति दिन १२ रुपये से भी कम ।



मैं १९९६ से २००८ तक इंटर कालेज में संस्कृत प्रवक्ता रहा यहाँ आसक्ति थी , मगर शिष्या के लिए नौकरी छोड़ना धर्म माना ।


इस बीच डिवैन लाइट, कारगिल शहीद, ब्लू हैविं में भी पढाया कुछ जगह से आज तक पैसे ही नहीं मिले। २००४ की यह कहानी है। २००८ में एक नक़ल माफिया में फस गया जहा पढाई होती ही नहीं है प्रदेश के कौने-कौने से ही नहीं अन्य राज्यों से भी विद्यार्थी नाम जद होते हैं । जैसे तैसे ४ महीने बाद मुक्त हुआ , प्रसाद बंटा, प्राण किया अब कहीं नहीं । सेवा nइवृत्ति का सुख अनुभव हुआ


२५ साल की पत्रकारिता में भी आसक्ति नहीं , एक छूटती रही अगली मिलाती रही अखबार की नौकरी। कोई यह कह दे की मैंने चाय पिलाकर खबर छपाई तो शारीर छोड़ दूंगा। सविका, मधावसंदेश, देशाधर्म, इटावा मेल , दिनरात, अमर उजाला , हिंदुस्तान , आज, नव भारत, दल २५ साल की पत्रकारिता में भी आसक्ति नहीं , एक छूटती रही अगली मिलाती रही अखबार की नौकरी। कोई यह कह दे की मैंने चाय पिलाकर खबर छपाई तो शारीर छोड़ दूंगा। सविका, मधावसंदेश, देशाधर्म, इटावा मेल , दिनरात, अमर उजाला , हिंदुस्तान , आज, नव भारत, DLA में अनासक्त सेवा।


इष्टिका पूरी अकादमी की गतिविधियाँ । न कभी चंदा हुआ न किसी योजना से जुड़ने की आकांक्षा।


इटावा के हजार साल के संपादन का ठेका क्यों टुटा?


२२ सितम्बर की घटने के बाद १५ दिन अचेत रहने के बाद । एम्स अथवा लाखानाऊ में इलाज के अरविंद केजरीवाल व संजय आजाद का प्रस्ताव क्यों ठुकराया । नया को-आर्डिनेटर बनाये जाने का बार - बार अनुरोश किया । जो नहीं माना गया , बार- बार कहा गया चिंता मत करो । आपकी सत्य निष्ठां पर किसी को संदेह नहीं । जब तक स्वस्थ नहीं होंगे तब तक इटावा में कोई कार्यक्रम नहीं होगा। आप पुराने को-आर्डिनेटर हैं और रहेंगे।


१७-१८ नबम्बर की ट्रेनिंग में गए ३ मैं से एक मात्र ने बयां जारी कर को -आर्डिनेटर देवेश शास्त्री से सावधान किया और कहा वे स्वयं भू हैं। जो कुछ नहीं है वही सब कुछ है । मेरी अभी भी को-आर्डिनेटर पद से कोई आसक्ति नहीं मगर यह षड्यंत्र सियासी है। को-आर्डिनेटर का तात्पर्य और इण्डिया अगेंस्ट करप्शन के मर्म लो न जानने वालो के कृत्य से का यह प्रभाव रहा - रामगोपाल अन्ना की उपवास में कह बैठे इटावा में अन्ना की टोपी लगाये भ्रष्ट कोग बैठे हैं । ये सब क्या है? चंदाखोरों ने किया मेरी जिंदगी का सौदा- हादसे में अचेत हुए शास्त्री के ही कथित साथी ने रिपोट लिखाई । होस आया तो मामले को जानने की लोशिश की तो पाता चला राजी नामा हो चूका है। कैसा राजीनामा ? जानने की कोशिश की तो उससे कोई जबाब नहीं मिला। सत्य-निष्ठां पर केंद्री आन्दोलन क्या पात्र व्यक्तियों के हाथ में है? यही पीड़ा है।


आगे हम उसका खुलाशा करेंगे की इलाहाबाद में देश भर में को-आर्डिनेटर न होने की बात कहने का राज़ क्या है।






Saturday, December 17, 2011

पागल?

बाबा भारती का घोड़ा सुल्तान को हाइजेक करने वाले खडग सिंह द्वारा यह नहीं कहलवाया राइटर ने कि बाबा पागल हो गया है। मगर इस कहानी में हाइजेकर ने मुहिम छेड़ रखी है झूठी अफवाह फैलाने की कि शास्त्री पागल हो गया है। पहले यह झूठी अफवाह फैलाई गई थी कि शास्त्री स्वयं भू को-आर्डिनेटर बनकर लोगो को भ्रमित कर रहा है, उससे सावधान रहें।
मैं आज वह हालात बताकर हल्का होना चाहता हूँ कि सच्चाई क्या है?
१- सत्य निष्ठ प्रशासनिक सेवा अधिकारियो,कर्मचारियो के संगठन सत्यमेव जयते का प्रारम्भिक गैर अधिकारी सदस्य हूँ, इस नाते ३० जनवरी २०११ को देश के चुनिन्दा जगहों पर हुए रूट मार्च में इटावा शामिल था, मुझे को-आर्डिनेटर बनाया जा चुका था। IAC की वेबसाइट पर मेरा नाम लगातार देखा जाता रहा।
3- ३० जनवरी २०११ को देश के चुनिन्दा जगहों पर हुए रूट मार्च में इटावा में ५० संगठनों ने सहभागिता की एक महत्वाकांक्षी ग्रुप ने इकाई होते हुए नेतृत्व दिखाने की कोशिश की ।
- 6 march2011 को लखनऊ में बैठक में अप्रैल में आन्दोलन पर चर्चा हो रही थी - राजधानी लखनऊ में प्रदर्शन में किस जिले से कितनी भीड़ आ सकती है। तमाम को-आर्डिनेटर कह रहे थे मै १०० लोगों की भीड़ , मै २०० लोगों की भीड़ ......... मैं उठा, मंच पर गया अरविन्द केजरीवाल के कान में कहा- इटावा से १ भी आदमी नहीं आएगा। वे वोले क्यों आप तो सक्रीय साथी हो। मैंने कहा - मैं नेता नहीं जो भीड़ लेकर आऊं १०० लोगों के आवागमन, भोजन आदि के लिए किसी की कृपा पर केन्द्रित होना पड़ेगा, मैं नहीं आ सकता। हाँ इटावा में १०-५ हजार की भीड़ जरुर हो जाएगी। अरविन्द केजरीवाल ने संचालक को पीछेकर माइक पकड़ा और कहा - आन्दोलन इस सत्यनिष्ठा से चलना चाहिए। लखनऊ के लोग लखनऊ में प्रदर्शन करें , कानपुर के कानपुर में , आगरा के आगरा में , इटावा के इटावा में ।
५- अप्रैल में अन्ना की अगुआई में अनशन की घोषणा हुई, इटावा में भी अनशन के साथ विभिन्न दलों के अध्यक्षों व जन प्रतिनिधियों को ज्ञापन देकर यह अनुरोध करने की योजना बनाई गई कि सभी स्थानीय नेता अपने हाई कमान से कहें- जन-लोकपाल का समर्थन करें। इतने में स्वनाम धन्य साथी ने आकर निवेदन किया - मै अभियान से जुड़कर आमरण अनशन करूंगा। मैंने अनुमति दे दी । वे महाशय पुराने खिलाड़ी है के चुनाव भी लड़ चुके हैं ।

क्रमशः जरी



Thursday, December 15, 2011

आभार बनाम धरना

लोकपाल को लेकर असमंजस , सियासी दलदल में फसा बिल। सत्य-निष्ठां के साथ युद्ध में कूदिये।
जिसने माँ का दूध पिया हो, आयें वे रण बंका।
उनका नहीं भरोसा जिनके रक्त-वंश में शंका॥
स्व ० राम प्रकाश शर्मा की इन पंक्तियों के साथ सभी जनों का आह्वान है कि यदि जान भावना के अनुरूप सशक्त लोकपाल आया तो २७ दिसंबर को संसद का आभार जताने हेतु कृतज्ञता दिवस मनाएं अन्यथा जिले भर में जहाँ-तहाँ (हर जगह) कीजिये अनशन। गाँव -गाँव, गली-गली अपने-अपने संगठन, ग्रुप व हमजोली के साथ करना होगा आन्दोलन। हर जगह हो अलग- अलग ग्रुप लीडर का नेतृत्व। इंडिया अगेंस्ट करप्शन संगठन नहीं , आन्दोलन है वह भी किसी की बंधुआ नहीं, विभिन ग्रुपों , संगठनों को उसी के लीडर के नेतृत्व में जनयुद्ध को गति देने के लिए हर जिले में हैं इंडिया अगेंस्ट करप्शन के को- आर्डीनेटर। याद कीजिये ३० जनवरी २०११ का रूट मार्च, इटावा में लगभग ५० संगठन इस अदना से कलमकार के आह्वान पर सड़क पर उतरे थे। हर ग्रुप का नेतृत्व उसी ग्रुप के लीडर कर रहे थे। सभी संगठन व ग्रुप का सामूहिक प्रयास ही इंडिया अगेंस्ट करप्शन है। किसी संगठन या व्यक्ति विशेष की उछल-कूद कर जेब में कैद रखने का प्रयास नहीं होना चाहिए। २७ दिसंबर से जिले के चप्पे-चप्पे में हो अनशन , नव वर्ष का नव प्रभात से शुरू करनी है जेल-यात्रा। यह मामूली आन्दोलन नहीं, सत्य युद्ध है उसी को जंग-ऐ-ईमान नाम दिया गया। आजादी की दूसरी लड़ाई (जन युद्ध) के प्रति यदि यह भावना हो की इससे क्या मिलेगा? तो घर बैठें, क्योकि यही महत्वाकांक्षा चंदाखोरी की जननी है, भ्रष्टाचार विरोधी अभियान का भ्रष्टाचारीकरण है उससे सावधान रहें। इंडिया अगेंस्ट करप्शन में चंदा का लेन देन निषिद्ध है। स्वतः स्फूर्त आन्दोलन स्वतः के व्यय से संचालित होना चाहिए, चंदाखोरी की विकृति ने आन्दोलन को किया कमजोर, जो सपा नेता राम गोपाल यादव को यह आरोप लगाने का मौका मिला- इटावा में अन्ना की टोपी लगाये तमाम भ्रष्ट लोग अनशन करते देखे गए। सत्य निष्ठां पर संदेह की कतई गुन्जाईस नहीं है। --देवेश शास्त्री को-आर्डीनेटर इटावा (उत्तर प्रदेश) ९२५९११९१८३, ९४५६८२५२१०

Wednesday, December 14, 2011

इंडिया अगेंस्ट करप्शन

इंडिया अगेंस्ट करप्शन कोई संगठन नहीं, अभियान है। उसे हाई जेक करना आसान नहीं। अग्निवेश बार-बार व्यक्तिवाद का विरोध करने की बात कहकर इंडिया अगेंस्ट करप्शन को अन्ना टीम से हाईजेक करने में जुटे रहे। आज न घर के हैं न घट के। इंडिया अगेंस्ट करप्शन बुलंदी पर है। इटावा में अधिकृत को-आर्डिनेटर घायल क्या हुआ यहाँ के तथाकथित अग्निवेश ने जाना अन्ना मर गया, जिसने इसकी अनशन करने की इच्छा का सम्मान करते हुए कभी २ दिन का संयोजक बनाया था वह ऐसे हाईजेक कर फर्जी अन्ना बन गया। याद आती है बाबा भारती की कहानी दस्यु खडग सिंह ने कैसे घोडा छीन लिया था। बाबा का कथन याद करो- खडग! ये किस्सा किसी से मत कहना, बरना लोगो की मनोदशा प्रभावित होगी । कोई किसी अपाहिज, गरीब, बीमार की मदद नहीं करेगा। ये क्या हुआ, जो कभी इंडिया अगेंस्ट करप्शन से जुड़ने की भीख माग रहा था आज असली रूप धारण कर बाबा भारती के घोड़े को हाईजेक करने वाले खडग सिंह को भी तार गया, गर्व के साथ कहता है कि घोडा बाबा का था ही नहीं। बाबा स्वयं भू स्वामी बन बैठा था, घोड़े पर मेरी बपोती है। ..... ये जनता है , सब जानती है ।

Monday, December 12, 2011

सदाचारी मुहिम में भ्रष्टाचारी घुसपैठ। जिम्मेदार कौन? मैं।


देवेश शास्त्री , को-आर्डिनेटर इटावा इंडिया अगेंस्ट करप्शन

Sunday, December 11, 2011

डॉ० रामगोपाल यादव ने कहा है- इटावा में अनशन करने वाले भ्रष्ट हैं।
इस कथन में कुछ सत्यता हो सकती है लेकिन सब भ्रष्ट नहीं हैं ये मेरा दावा है। स्वतः स्फूर्त आन्दोलन में आचरण का मूल्याकन कर इंट्री देना असंभव है। ११ दिसंबर के उपवास में मैंने अपने वक्तव्य में कहा- सत्य निष्ठ लोग ही कुछ परिवर्तन ला सकते हैं- मिटाना है यदि भ्रष्टाचार, जगाएं मन में शुद्ध विचार । करें हम तौबा तृष्णा से, सभी के प्रति हो सद व्यवहार॥ ऐसा आचरण नहीं होना चाहिए जो खद्दरधारी उंगली उठाने का साहस कर सकें।
देवेश शास्त्री, को-आर्डिनेटर इंडिया अगेंस्ट करप्शन इटावा

Sunday, December 4, 2011

जंग में लगी जंग

इंडिया अगेंस्ट करप्शन में अब कोई को-आर्डिनेटर (प्रभारी) नहीं , यह बात बार-बार इटावा के ३ ऐसे कार्यकर्ता चिल्ला रहे हैं जिन्हें १७-१८ नबम्बर को प्रशिक्षण लेने इलाहाबाद गए थे मैं उन महापुरुष को नतमस्तक होकर प्रणाम करता हूँ जिन्होंने अंततः अभियान इटावा में तो हाईजेक करने में कामयाबी हासिल कर ली । ब्रेन की चोट से जब अचेत था आई सी यु में था , जो लोग देखने गए थे वे बताते हैं की मैं इसी अभियान के लिए चिल्ला रहा था मुझे जाने दो मीटिंग होनी है मुझे अध्यक्षता करनी है। हालाकि यदि मैं ऐसा बक रहा था तो क्यों ? यह आधात्मिक दृष्टि से देखिये , जब चेतनता आई तो जंग में लगाती जंग से दुखी नहीं प्रफुल्लित हूँ तो क्यों ?

Friday, July 1, 2011

उच्चारण स्थान







अकुहविसर्जनीयानाम कंठः अ, क वर्ग ( क ख ग घ ड़) ह , विसर्ग का स्थान कंठ है।







इचुयशानाम तालु इ, च वर्ग ( च छ ज झ ) य, श का स्थान तालु है।







ऋटुरषानाम मूर्धा ऋ, ट वर्ग (ट ठ ड़ ढ ण ) र ष का स्थान मूर्धा है।






ल्रितुलसानाम दन्तः ल्र त वर्ग (त थ द ध न ) ल का स्थान दन्त है।






उपूपध्मानीयानाम ओष्ठौ उ प वर्ग (प फ बी भ म ) का स्थान होंठ हैं।






ञ्म ड़ण नानाम नासिका च प्रत्येक वर्ग के पांचवें वर्ण का स्थान नाक भी है।




ए ओ का स्थान कंठ तालु व ऐ , औ का स्थान कंठ ओष्ठ है।



वकारस्य danto shtham




Saturday, February 12, 2011

मिस्र के बाद भारत

मिस्र में १८ दिन चला जन-युद्ध
१८ दिन चला था महा-भारत ।
अंत हुआ अधर्म, अन्याय, असत, अत्याचार का।
अब बारी है भारत की,
जो अधर्म, अन्याय, असत, अत्याचार, अनाचार भ्रष्टाचार,व्यभिचार आदि
कदाचार से व्यथित है।
चुनाव से १८ दिन पूर्व
खद्दरधारी कलिनेमी शरीखे नेताओं के खिलाफ खड़ी हो जाये जनता
अपने बीच से किसी सद्धर्मी, ईमानदार को चुने प्रतिनिधि।
यही होगा।
बस १८ दिन का जन-आन्दोलन यानी जंग-ऐ-ईमान बदल देगा भारत की तस्वीर।
वोट हमारा - राज तुम्हारा, नहीं चलेगा- नहीं चलेगा ।
- देवेश शास्त्री