लोकपाल को लेकर असमंजस , सियासी दलदल में फसा बिल। सत्य-निष्ठां के साथ युद्ध में कूदिये।
जिसने माँ का दूध पिया हो, आयें वे रण बंका।
उनका नहीं भरोसा जिनके रक्त-वंश में शंका॥
स्व ० राम प्रकाश शर्मा की इन पंक्तियों के साथ सभी जनों का आह्वान है कि यदि जान भावना के अनुरूप सशक्त लोकपाल आया तो २७ दिसंबर को संसद का आभार जताने हेतु कृतज्ञता दिवस मनाएं अन्यथा जिले भर में जहाँ-तहाँ (हर जगह) कीजिये अनशन। गाँव -गाँव, गली-गली अपने-अपने संगठन, ग्रुप व हमजोली के साथ करना होगा आन्दोलन। हर जगह हो अलग- अलग ग्रुप लीडर का नेतृत्व। इंडिया अगेंस्ट करप्शन संगठन नहीं , आन्दोलन है वह भी किसी की बंधुआ नहीं, विभिन ग्रुपों , संगठनों को उसी के लीडर के नेतृत्व में जनयुद्ध को गति देने के लिए हर जिले में हैं इंडिया अगेंस्ट करप्शन के को- आर्डीनेटर। याद कीजिये ३० जनवरी २०११ का रूट मार्च, इटावा में लगभग ५० संगठन इस अदना से कलमकार के आह्वान पर सड़क पर उतरे थे। हर ग्रुप का नेतृत्व उसी ग्रुप के लीडर कर रहे थे। सभी संगठन व ग्रुप का सामूहिक प्रयास ही इंडिया अगेंस्ट करप्शन है। किसी संगठन या व्यक्ति विशेष की उछल-कूद कर जेब में कैद रखने का प्रयास नहीं होना चाहिए। २७ दिसंबर से जिले के चप्पे-चप्पे में हो अनशन , नव वर्ष का नव प्रभात से शुरू करनी है जेल-यात्रा। यह मामूली आन्दोलन नहीं, सत्य युद्ध है उसी को जंग-ऐ-ईमान नाम दिया गया। आजादी की दूसरी लड़ाई (जन युद्ध) के प्रति यदि यह भावना हो की इससे क्या मिलेगा? तो घर बैठें, क्योकि यही महत्वाकांक्षा चंदाखोरी की जननी है, भ्रष्टाचार विरोधी अभियान का भ्रष्टाचारीकरण है उससे सावधान रहें। इंडिया अगेंस्ट करप्शन में चंदा का लेन देन निषिद्ध है। स्वतः स्फूर्त आन्दोलन स्वतः के व्यय से संचालित होना चाहिए, चंदाखोरी की विकृति ने आन्दोलन को किया कमजोर, जो सपा नेता राम गोपाल यादव को यह आरोप लगाने का मौका मिला- इटावा में अन्ना की टोपी लगाये तमाम भ्रष्ट लोग अनशन करते देखे गए। सत्य निष्ठां पर संदेह की कतई गुन्जाईस नहीं है। --देवेश शास्त्री को-आर्डीनेटर इटावा (उत्तर प्रदेश) ९२५९११९१८३, ९४५६८२५२१०
Thursday, December 15, 2011
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