Friday, July 31, 2009

जिम्मेदार कौन?

अनाचार अत्याचार दुराचार व्यभिचार भ्रष्टाचार इस समय कण कण में व्याप्त है। सभी लोग बुरी तरह त्रस्त हैं। रिश्वतखोरी अब सामान्य कार्य व्यवहार का रूप ले चुकी है। मंत्री से लेकर संत्री तक कथित विरागी संत से लेकर जन सामान्य तक सभी भ्रष्ट हो चुके हैं। नैतिकता धर्म इमान सत्य अहिंसा व सदाचार सभी कुछ सिर्फ़ किताबों और व्याख्यानों तक सीमित हैं स्वयं चिन्तक व व्याख्याता धनतृष्णा में भ्रष्ट आचरण करते हुए बगुलाभगत बने सदाचारी सिद्ध कर रहे हैं।
इस तरह भ्रष्टाचार तेजी से शिष्टाचार का रूप धारण करता जा रहा है। अर्द्धशताब्दी के अन्दर भ्रष्टता अपने चरम पर पहुंच गई। लिहाजा सभी इस भ्रष्ट बातावरण से तंग तो आ गए हैं किंतु भ्रष्टाचार के विरुद्ध आवाज उठाने की वजाय निराशावादी दृष्टिकोण अपनाते हुए समझोतावादी बने हुए हैं। आख़िर इस हालत के लिए जिम्मेदार कौन है?

Friday, July 24, 2009

भ्रष्टाचार मिटाने का संकल्प

मानव का जीवन सत् पर आधारित होना चाहिए, गोस्वामी तुलसीदास ने लिखा है-बड़े भाग मानस तन पावा। सुर दुर्लभ सद्ग्रंथन गावा ......
८४ लाख योनियो के चक्कर से छुटकारा पाने को अर्थात मुक्ति प्राप्त कराने को मानव शरीर मिला है। किंतु तृष्णा ने मानव को अंधा बना दिया। धन की तृष्णा में मनुष्य अनैतिक तरीके से धन कमाने में जुटा है और उसके जीवन का आधार सत् ईमान धर्म की बजाय असत अन्याय व अधर्म हो गया। जनकल्याण के लिए इष्टिकापुरी अकादमी ने सेवानिवृत्त अधिकारियों कर्मचारियों व शिक्षकों का एंटी करप्शन ग्रुप बना कर धर्म व न्याय के युद्ध का बिगुल फूंका है।जून के अन्तिम सप्ताह जीआइसी के पूर्व प्रधानाचार्य श्री ब्रजानंद शर्मा के सरैया इटावा स्थित आवास पर करीब २ दर्जन सेवानिवृत्त अधिकारियों कर्मचारियों शिक्षकों की बैठक हुई जिसकी अध्यक्षता वयोवृद्ध शिक्षाविद श्री राम वर्मा ने की सम्मानित पूर्व प्रवक्ता सरदार अहमद अलीग मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे।बैठक में इष्टिकापुरी अकादमी के महासचिव देवेश शास्त्री ने भ्रष्टाचार को उखाड़ फेंकने के लिए युद्ध छेड़ने की घोषणा की और जब कुछ लोगों ने कहा - भ्रष्टाचार की जड़ें काफी मजबूत है कभी नही मिट सकता भ्रष्टाचार। इसपर श्री शास्त्री ने बेबाक कहा- १८५७ में यह कहा जाता कि अंग्रेजों कि जड़ें मजबूत हैं इन्हें भारत से कैसे खदेडा जाएगा? तो जंग ऐ आजादी कि चिंगारी नहीं सुलगती। जंग छिडी और ९० वर्ष बाद १९४७ में देशवासियों ने जंग जीती । इसी तरह हम भ्रष्टाचार को उखाड़ फेंकने की जंग छेड़ रहे हैं भले ही जीत १०० या २०० वर्ष बाद क्यो न मिलें। इस बात का न केवल सभी ने समर्थन किया बल्कि उनका उत्साह कई गुना बढ़ गया। कार्ययोजना को अन्तिम रूप दिया गया। साथ ही उन्होंने यह भी कहा - जो अपराधी होता है उसका आत्मबल शून्य हो जाता है जैसे बिनातिकट सफर कराने वाले रेलयात्री को हर वक्त चैकिंग का भय बना रहता है इतने में टी टी आ जाए तो उसकी बेचेनी ही उसे पकड़वा देती है बैसे ही रिश्वतखोर भी आत्मबल शून्य होता है मगर उसे फंसने की स्थिति में रिश्वत के ही बूते पर छूट जाने का विश्वास उसमें कुछ दम भरता है। श्री शास्त्री ने कहा- यह कहना ग़लत है कि भ्रष्टाचार कि जड़े काफ़ी मजबूत है। वास्तव में भ्रष्टाचार कि जड़े काफ़ी कमजोर हैं। सिर्फ़ ५-१० प्रतिशत ही भ्रष्ट है, किंतु ९०-९५ प्रतिशत लोगो का भ्रष्ट होना विवशता है। यदि दृढ़ इक्षाशक्ति के साथ पूरे देश में एक साथ जंग छिड़े तो भ्रष्टाचार मिटाने में ज्यादा बक्त नहीं लगेगा।
उन्होंने सेवानिवृत्त अफसरों कर्मचारिओं शिक्षको से कहा- यदि आप सोचें कि इसमें हमें क्या फायदा? ऐसी मानसिकता वाले अपने घर बैठें क्योकि ऐसे लोग अभियान को दूषित कर बदनामी का टीका लगा देंगे।यह अभियान त्याग और बलिदान की भावना से परिपूरित अनुष्ठान है जो आपके जीवन के अन्तिम पढाव पर उद्धार का साधन मोक्ष मार्ग प्रशस्त करने तथा यशप्रदान करने वाला होगा। सत्य-धर्म की पताका जब कभी फहरेगी तब आप का नाम स्वर्नाक्श्रो में अंकित रहेगा। नमो इष्ट सत्याय के साथ जंगे ईमान का बिगुल फूंक दिया गया।






नोट- इस अभियान की प्रत्येक गतिविधि इसी ब्लॉग पर तत्काल उपलब्ध मिलेगी।

कैसा हां-हाकार है

ये कैसा है कोलाहल कैसा हां-हाकार है ।
चारों ओर दिखाई देता भीषण नरसंहार है॥

निहित स्वार्थ वश हिंसा बढ़ती। बहकावे में जनता मरती ।
खून की नदियाँ यहाँ उफनती। मन में संकीर्णता पनपती।
मर्यादा के ऊपर कुर्सीराग का बज्र प्रहार है।
चारों ओर दिखाई देता भीषण नरसंहार है॥

कोई खाली पेट तड़पता। दो रोटी के लिए झगड़ता ।
बड़े पेट से दबकर मरता। घुट-घुट करके प्राण निकलता।
शोषक डंडीमार पनपता बढ़ता धन भंडार है।
चारों ओर दिखाई देता भीषण नरसंहार है॥

गिरता है शिक्षा का स्तर। तुष्टीकरण बनाता बदतर।
सुलग उठा है शिक्षा परिसर। राजनीत छात्रों के सर पर।
मेधा कुंठित होती अब तो ज्ञान दान व्यापार है।
चारों ओर दिखाई देता भीषण नरसंहार है॥

आरक्षी बल स्वयं अरक्षित। अपराधी खादी संरक्षित।
भुला दिए सब जनता के हित। घटनाएँ बढ़ चली अपरमित।
मुल्जिमान को खुली हवा सज्जन को कारागार है।
चारों ओर दिखाई देता भीषण नरसंहार है॥

कैसा भी हो काम कराना। जीते को चाहे हरवाना।
मरे को भी जिंदा करवाना। दफ्तर बैंक कचहरी थाना।
काले धन के स्रोत उजागर घूसखोर व्यवहार है।
चारों ओर दिखाई देता भीषण नरसंहार है॥

कहने को तो अभी बहुत है। अपनी भी तो बुरी नियत है।
विजय वरन कर रहा असत है। इनमें उनकी कहाँ बकत है।
निंदक नियरे नहीं चाटुकारों को मिलता प्यार है।
चारों ओर दिखाई देता भीषण नरसंहार है॥

-देवेश शास्त्री

Wednesday, July 22, 2009

माखन-लेपन नहीं मित्र पेट्रोल छिड़कना होगा।

सदाचार का पाठ पदाते युग के युग बीते हैं।
दुराचार की अति के आगे सदघट सब रीते हैं॥

नहीं पाठ्यक्रम सफल हो सके सिद्ध प्रयोग हुए हैं।
कटु औषधि के द्बारा ही मन-देह निरोग हुए हैं॥

असत , अधर्म, भ्रष्टता, आपाधापी बहुत गा चुके।
अलंकरण सम्मान, प्रशस्ती आख़िर बहुत पा चुके॥

बन्द करो यह पाठ पदाना बिगुल फूंक दो रन का।
सत्य धर्म की ध्वजा उठाकर पालन होवे प्रण का॥

जब संघर्ष छेड़ दोगे तब निश्चित जय पाओगे।
अगर नियति कह रहे टालते भय पर भय खाओगे॥

कलम मार्ग दर्शक है तो फ़िर तोप बनानी होगी।
स्याही की बूंदें बम की सामर्थ्य समानी होगी॥

माखन-लेपन नहीं मित्र पेट्रोल छिड़कना होगा।
चांदी नहीं, चर्म का जूता जमकर जड़ना होगा॥

लंका में चढ़कर ही रावण को सदगति देनी होगी।
दह में कूद कालिया नथ यमुना पवित्र करनी होगी॥

अधर्म अकर्म दुर्ग पर चढ़ परचम लहराओ।
सत्यमेव जयते सार्थक कर धर्म ध्वजा फहराओ॥

-देवेश शास्त्री

Tuesday, July 21, 2009

भ्रष्टाचार के विरुद्ध छेड़ें जंग

आप देश के किसी भी भाग में रहते हों आप वहां के सेवानिवृत्त इमानदार अधिकारिओं कर्मचारिओं को एकजुट करें और उनका एंटी करप्शन ग्रुप वनाएं।
अभियान चलायें।
भ्रष्टाचार मिटाए ।
इस वारे में ९२५९११९१८३ पर अथवा aishtikdarshan.satya@gmail.com पर अवश्य सूचित करें।
सहयोग के लिए धन्यवाद ।

कार्ययोजना

भ्रष्टाचार के विरुद्ध छेड़ी गई जंग के पहले चरण में इटावा के सेवानिवृत्त अधिकारियों कर्मचारियों व शिक्षकों का एंटी करप्शन ग्रुप जिला स्तरीय सरकारी कार्यालयों में धर्म और ईमान का पाठ पढाएगा। कर्मगति के पारलौकिक परिणाम से आगाह करेगा। साथ ही अनीति अधर्म अन्याय व असत मार्ग से धनार्जन (भ्रष्टाचार) न कराने की अपील करेगा। यह क्रम ३१ दिसम्बर २००९ तक चलेगा।
दूसरे चरण में जनवरी २०१० से जन जागरण अभियान छेड़ा जाएगा जिसके अर्न्तगत यदि कोई भी किसी से रिश्वत मांगता है तो वह एंटी करप्शन ग्रुप को सूचित करेगा तो ग्रुप सम्बंधित विभागाध्यक्ष से मिलकर हर स्तर पर जंग । प्रत्येक गतिविधि प्रिंट व इलेक्टोनिक मीडिया की देख-रेख में जारी रहेगी।

Sunday, July 19, 2009

ज़रा सोचो तो ...

मानव का जीवन सत् पर आधारित होना चाहिए, गोस्वामी तुलसीदास ने लिखा है-
बड़े भाग मानस तन पावा। सुर दुर्लभ सद्ग्रंथन गावा॥
साधन धाम मोक्ष कर द्वारा। ......
८४ लाख योनियो के चक्कर से छुटकारा पाने को अर्थात मुक्ति प्राप्त कराने को मानव शरीर मिला है। किंतु तृष्णा ने मानव को अंधा बना दिया। धन की तृष्णा में मनुष्य अनैतिक तरीके से धन कमाने में जुटा है और उसके जीवन का आधार सत् ईमान धर्म की बजाय असत अन्याय व अधर्म हो गया।
जनकल्याण के लिए इष्टिकापुरी अकादमी ने सेवानिवृत्त अधिकारियों कर्मचारियों व शिक्षकों का एंटी करप्शन ग्रुप बना कर धर्म व न्याय के युद्ध का बिगुल फूंका है।
जून के अन्तिम सप्ताह जीआइसी के पूर्व प्रधानाचार्य श्री ब्रजानंद शर्मा के सरैया इटावा स्थित आवास पर करीब २ दर्जन सेवानिवृत्त अधिकारियों कर्मचारियों शिक्षकों की बैठक हुई जिसकी अध्यक्षता वयोवृद्ध शिक्षाविद श्री राम वर्मा ने की सम्मानित पूर्व प्रवक्ता सरदार अहमद अलीग मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे।
बैठक में इष्टिकापुरी अकादमी के महासचिव देवेश शास्त्री ने भ्रष्टाचार को उखाड़ फेंकने के लिए युद्ध छेड़ने की घोषणा की और जब कुछ लोगों ने कहा - भ्रष्टाचार की जड़ें काफी मजबूत है कभी नही मिट सकता भ्रष्टाचार। इसपर श्री शास्त्री ने बेबाक कहा- १८५७ में यह कहा जाता कि अंग्रेजों कि जड़ें मजबूत हैं इन्हें भारत से कैसे खदेडा जाएगा? तो जंग ऐ आजादी कि चिंगारी नहीं सुलगती। जंग छिडी और ९० वर्ष बाद १९४७ में देशवासियों ने जंग जीती । इसी तरह हम भ्रष्टाचार को उखाड़ फेंकने कि जंग छेड़ रहे भले जीत१०० या २०० वर्ष क्यो न मिलें। इस बात का न केवल सभी ने समर्थन किया बल्कि उनका उत्साह कई गुना बढ़ गया। कार्ययोजना को अन्तिम रूप दिया गया।

नोट- इस अभियान की प्रत्येक गतिविधि इसी ब्लॉग पर तत्काल उपलब्ध मिलेगी।