Sunday, July 19, 2009

ज़रा सोचो तो ...

मानव का जीवन सत् पर आधारित होना चाहिए, गोस्वामी तुलसीदास ने लिखा है-
बड़े भाग मानस तन पावा। सुर दुर्लभ सद्ग्रंथन गावा॥
साधन धाम मोक्ष कर द्वारा। ......
८४ लाख योनियो के चक्कर से छुटकारा पाने को अर्थात मुक्ति प्राप्त कराने को मानव शरीर मिला है। किंतु तृष्णा ने मानव को अंधा बना दिया। धन की तृष्णा में मनुष्य अनैतिक तरीके से धन कमाने में जुटा है और उसके जीवन का आधार सत् ईमान धर्म की बजाय असत अन्याय व अधर्म हो गया।
जनकल्याण के लिए इष्टिकापुरी अकादमी ने सेवानिवृत्त अधिकारियों कर्मचारियों व शिक्षकों का एंटी करप्शन ग्रुप बना कर धर्म व न्याय के युद्ध का बिगुल फूंका है।
जून के अन्तिम सप्ताह जीआइसी के पूर्व प्रधानाचार्य श्री ब्रजानंद शर्मा के सरैया इटावा स्थित आवास पर करीब २ दर्जन सेवानिवृत्त अधिकारियों कर्मचारियों शिक्षकों की बैठक हुई जिसकी अध्यक्षता वयोवृद्ध शिक्षाविद श्री राम वर्मा ने की सम्मानित पूर्व प्रवक्ता सरदार अहमद अलीग मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे।
बैठक में इष्टिकापुरी अकादमी के महासचिव देवेश शास्त्री ने भ्रष्टाचार को उखाड़ फेंकने के लिए युद्ध छेड़ने की घोषणा की और जब कुछ लोगों ने कहा - भ्रष्टाचार की जड़ें काफी मजबूत है कभी नही मिट सकता भ्रष्टाचार। इसपर श्री शास्त्री ने बेबाक कहा- १८५७ में यह कहा जाता कि अंग्रेजों कि जड़ें मजबूत हैं इन्हें भारत से कैसे खदेडा जाएगा? तो जंग ऐ आजादी कि चिंगारी नहीं सुलगती। जंग छिडी और ९० वर्ष बाद १९४७ में देशवासियों ने जंग जीती । इसी तरह हम भ्रष्टाचार को उखाड़ फेंकने कि जंग छेड़ रहे भले जीत१०० या २०० वर्ष क्यो न मिलें। इस बात का न केवल सभी ने समर्थन किया बल्कि उनका उत्साह कई गुना बढ़ गया। कार्ययोजना को अन्तिम रूप दिया गया।

नोट- इस अभियान की प्रत्येक गतिविधि इसी ब्लॉग पर तत्काल उपलब्ध मिलेगी।

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