मानव का जीवन सत् पर आधारित होना चाहिए, गोस्वामी तुलसीदास ने लिखा है-बड़े भाग मानस तन पावा। सुर दुर्लभ सद्ग्रंथन गावा ......
८४ लाख योनियो के चक्कर से छुटकारा पाने को अर्थात मुक्ति प्राप्त कराने को मानव शरीर मिला है। किंतु तृष्णा ने मानव को अंधा बना दिया। धन की तृष्णा में मनुष्य अनैतिक तरीके से धन कमाने में जुटा है और उसके जीवन का आधार सत् ईमान धर्म की बजाय असत अन्याय व अधर्म हो गया। जनकल्याण के लिए इष्टिकापुरी अकादमी ने सेवानिवृत्त अधिकारियों कर्मचारियों व शिक्षकों का एंटी करप्शन ग्रुप बना कर धर्म व न्याय के युद्ध का बिगुल फूंका है।जून के अन्तिम सप्ताह जीआइसी के पूर्व प्रधानाचार्य श्री ब्रजानंद शर्मा के सरैया इटावा स्थित आवास पर करीब २ दर्जन सेवानिवृत्त अधिकारियों कर्मचारियों शिक्षकों की बैठक हुई जिसकी अध्यक्षता वयोवृद्ध शिक्षाविद श्री राम वर्मा ने की सम्मानित पूर्व प्रवक्ता सरदार अहमद अलीग मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे।बैठक में इष्टिकापुरी अकादमी के महासचिव देवेश शास्त्री ने भ्रष्टाचार को उखाड़ फेंकने के लिए युद्ध छेड़ने की घोषणा की और जब कुछ लोगों ने कहा - भ्रष्टाचार की जड़ें काफी मजबूत है कभी नही मिट सकता भ्रष्टाचार। इसपर श्री शास्त्री ने बेबाक कहा- १८५७ में यह कहा जाता कि अंग्रेजों कि जड़ें मजबूत हैं इन्हें भारत से कैसे खदेडा जाएगा? तो जंग ऐ आजादी कि चिंगारी नहीं सुलगती। जंग छिडी और ९० वर्ष बाद १९४७ में देशवासियों ने जंग जीती । इसी तरह हम भ्रष्टाचार को उखाड़ फेंकने की जंग छेड़ रहे हैं भले ही जीत १०० या २०० वर्ष बाद क्यो न मिलें। इस बात का न केवल सभी ने समर्थन किया बल्कि उनका उत्साह कई गुना बढ़ गया। कार्ययोजना को अन्तिम रूप दिया गया। साथ ही उन्होंने यह भी कहा - जो अपराधी होता है उसका आत्मबल शून्य हो जाता है जैसे बिनातिकट सफर कराने वाले रेलयात्री को हर वक्त चैकिंग का भय बना रहता है इतने में टी टी आ जाए तो उसकी बेचेनी ही उसे पकड़वा देती है बैसे ही रिश्वतखोर भी आत्मबल शून्य होता है मगर उसे फंसने की स्थिति में रिश्वत के ही बूते पर छूट जाने का विश्वास उसमें कुछ दम भरता है। श्री शास्त्री ने कहा- यह कहना ग़लत है कि भ्रष्टाचार कि जड़े काफ़ी मजबूत है। वास्तव में भ्रष्टाचार कि जड़े काफ़ी कमजोर हैं। सिर्फ़ ५-१० प्रतिशत ही भ्रष्ट है, किंतु ९०-९५ प्रतिशत लोगो का भ्रष्ट होना विवशता है। यदि दृढ़ इक्षाशक्ति के साथ पूरे देश में एक साथ जंग छिड़े तो भ्रष्टाचार मिटाने में ज्यादा बक्त नहीं लगेगा।
उन्होंने सेवानिवृत्त अफसरों कर्मचारिओं शिक्षको से कहा- यदि आप सोचें कि इसमें हमें क्या फायदा? ऐसी मानसिकता वाले अपने घर बैठें क्योकि ऐसे लोग अभियान को दूषित कर बदनामी का टीका लगा देंगे।यह अभियान त्याग और बलिदान की भावना से परिपूरित अनुष्ठान है जो आपके जीवन के अन्तिम पढाव पर उद्धार का साधन मोक्ष मार्ग प्रशस्त करने तथा यशप्रदान करने वाला होगा। सत्य-धर्म की पताका जब कभी फहरेगी तब आप का नाम स्वर्नाक्श्रो में अंकित रहेगा। नमो इष्ट सत्याय के साथ जंगे ईमान का बिगुल फूंक दिया गया।
नोट- इस अभियान की प्रत्येक गतिविधि इसी ब्लॉग पर तत्काल उपलब्ध मिलेगी।
Friday, July 24, 2009
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