अब आख़िर श्रीमान आफिस में क्या कर रहे हैं?
छुट्टी तो ५ बजे हो गई थी, अब बज रहे हैं रात के १० ?
आज सन्डे को क्यो खुल गया ऑफिस?
जी हाँ! छुट्टी में ओफ्फिसर्स अपने बफादार बाबुओ के साथ दफ्तर में बैठ कर क्या वास्तव में ऑफिस वर्क निपटाते हैं या फ़िर करते हैं दंद-फंद ?
Dios ऑफिस में रात १० बजे यदि बत्ती जलती दिखे तो समझो किसी कॉलेज में
शिक्षनेतर कर्मचारी की नियुक्ति के लिए मिली रिश्वत के बंदरबांट व आवश्यक कागजो की लिखा पढ़ी के साथ चलती है पार्टी। bsa दफ्तर में भी ऑफिस टाइम के बाद ही अध्यापकों की नियुक्ति या स्थानान्तरण की गोटें कामयाब होती हैं। किसी बैंक शाखा में अन्दर से ताला डालकर मेनेजर व सिर्फ़ १ या २ बाबू काम कर रहे हों तो समझो लम्बी हेरा फेरी चल रही है अथवा मोटी रिश्वत पर किसी ख़ास का लोन मंजूर हो रही है। सिंचाई, नहर, pwd सहित विभिन्न कार्यालयों में वित्त वर्ष के अन्तिम दिनों देर रात तक खुले रहते ताले और बनती है मिसकौट शेष बजट के गोलमाल की। हमदर्द ठेकेदार को होता है बिना काम के भुगतान।
यह आलम पूरे देश का है।
सभी नेता, अफसर, बाबू, चपराशी सहित हर कोई कर रहा मनमानी कौन रोके?
हम और आप भी आपस में एक-दूसरे को दे रहे हैं धोखा , लगे है अपना उल्लू सीधा कराने में, कदम -कदम पर आनाचार, अत्याचार, व्यभिचार और भ्रष्टाचार।
चारों ओर आपा-धापी , हम्माम में सब हैं नंगे।
Sunday, October 25, 2009
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